APMC गोंदिया में बड़ा सियासी भूकंप: सभापति भाऊराव उके और उपसभापति पप्पू पटले की कुर्सी छिनी, अविश्वास प्रस्ताव भारी बहुमत से पारित

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18 में से 15 संचालकों ने दिखाई अभूतपूर्व एकजुटता, उपविभागीय अधिकारी (SDM) मा. चंद्रकांत खंडाईत के समक्ष हाथ उठाकर हुआ मतदान

​गोंदिया:
कृषि उपज मंडी समिति (APMC) गोंदिया की राजनीति में मंगलवार, 18 अगस्त 2026 को एक बड़ा और ऐतिहासिक उलटफेर देखने को मिला। APMC के वर्तमान सभापति भवराव उके और उपसभापति राजकुमार उर्फ ‘पप्पू’ पटले को अविश्वास प्रस्ताव के माध्यम से उनके पद से बेदखल कर दिया गया है। मंडी समिति के कुल 18 में से 15 संचालकों ने एक सुर में एकजुटता दिखाते हुए इस अविश्वास प्रस्ताव के पक्ष में अपना निर्णायक मत दिया।


​SDO की मौजूदगी में हुई प्रक्रिया
​मिली जानकारी के अनुसार, मंगलवार को अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा और मतदान के लिए उपविभागीय अधिकारी (SDO) मा. चंद्रकांत खंडाईत की अध्यक्षता में एक विशेष बैठक बुलाई गई थी। इस महत्वपूर्ण बैठक के दौरान अधिकारी के समक्ष उपस्थित सभी 15 संचालक तथा संचालिकाओं ने हाथ उठाकर अपना स्पष्ट मतदान किया और भारी बहुमत से सभापति एवं उपसभापति को पदमुक्त करने का फरमान सुनाया।

*​दिग्गज रहे नदारद, 15 सदस्यों ने दिखाई ताकत*

​इस पूरी राजनीतिक उठापटक में सबसे खास बात यह रही कि जिनके खिलाफ यह प्रस्ताव लाया गया था, वे यानी सभापति भावराव उके और उपसभापति राजकुमार पटले इस बैठक से अनुपस्थित रहे। उनके साथ ही एक अन्य संचालक अनुपस्थित रहे।

​इन 15 संचालकों ने अविश्वास प्रस्ताव के पक्ष में किया मतदान:
​इन तीन सदस्यों की गैरमौजूदगी के बीच, शेष बचे सभी 15 सदस्यों ने अपनी पूरी ताकत और एकजुटता दिखाई। अविश्वास प्रस्ताव के समर्थन में एक साथ खड़े होकर मतदान करने वाले 15 संचालक एवं संचालिकाओं के नाम इस प्रकार हैं:​ श्री मुनेश जगन्नाथजी रहांगडाले, श्री धनंजय देऊभाऊजी तुरकर ,श्री राजीव रुपचंदजी ठकरेले,​श्री ओमेश्वर सुखदेवजी चौधरी,​श्री चेतनकुमार भैयाभाऊजी बहेकार,​श्री राधाकृष्ण नारायणजी ठाकुर,​सौ. कौशल छत्रपालजी तुरकर,​सौ. शामकला जितलालजी पाचे​श्री जितेश लेखनलालजी टेंभरे​श्री पंकज सुंदरलालजी यादव​ ​श्री मुरलीधर भोजरामजी नागपुरे​श्री धनलाल बालचंदजी ठाकरे​श्री अरुण नागोरावजी गजभिये​श्री सुमित लोकेशकुमारजी भालोटिया​श्री विजय नारायणजी उके, ​APMC के भीतर इन 15 संचालकों की इस अभूतपूर्व एकजुटता ने सत्ता के सारे समीकरण पूरी तरह से बदल कर रख दिए हैं। सभापति और उपसभापति के पद से हटाए जाने के बाद अब मंडी समिति के गलियारों में नए नेतृत्व को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।

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